गुना में ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक का शंखनाद, भव्य घटयात्रा में हाथियों और बग्गियों पर निकले इंद्र परिवार

विंटेज कारों और शाही बग्गियों का दिखा वैभव, पहले दिन हुआ गर्भ कल्याण पूर्वार्ध के कार्यक्रम
शहर में धार्मिक उत्साह और भक्ति का एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब जैनाचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रीमज्जिनेन्द्र आदिनाथ जिनबिम्ब पंचमुखी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा, त्रय गजरथ महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक महोत्सव का आगाज तडक़े ठीक 5:30 बजे प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया द्वारा मंत्रोच्चारणों के बीच ध्वजारोहण के साथ हुआ। तत्पश्चात एक विशाल व नयनाभिराम घटयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई। इस भव्य चल समारोह में शामिल होने के लिए सभी पात्र और श्रद्धालु अलसुबह से ही सर्राफा बाजार स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर एकत्रित होने लगे थे, जहां सभी रथ, विमान, हाथी और विशेष कारें कतारबद्ध खड़ी की गई थीं। इस दौरान सभी इंद्र-इंद्राणियों और महापात्रों ने धुले हुए शुद्ध मांगलिक वस्त्र धारण कर रखे थे। इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में पांच सौधर्म इंद्र एवं भगवान े माता-पिता पांच विशाल हाथियों पर सवार होकर निकले, जबकि दर्जनों सजी-धजी बग्गियों में भगवान के माता-पिता, ईशान इंद्र, सनत कुमार इंद्र सहित विभिन्न इंद्र अपने परिवारों के साथ शामिल हुए। शहर के मुख्य मार्गों से निकले इस चल समारोह में विशेष मॉडल की विंटेज कारें आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें सवार इंद्र परिवारों का वैभव देखते ही बन रहा था।
इस विशाल चल समारोह के क्रम में सबसे आगे दो भव्य धर्म ध्वजाएं और घटयात्रा का मुख्य बैनर चल रहा था, जिसके पीछे सरदार मालवा बैंड अपनी सुमधुर धार्मिक धुनों से वातावरण को गुंजायमान कर रहा था। इसके ठीक पीछे कलश से सजे ठेले और आचार्य श्री व गुरुजी के चित्र वाले श्रद्धा के प्रतीक ठेले चल रहे थे। चल समारोह के अग्रिम भाग में सौधर्म इंद्र भूपेश जैन म्याना परिवार का ध्वजा वाहक हाथी अपनी भव्यता बिखेर रहा था, जिसके पीछे संगम बैंड की धुन पर थिरकते श्रद्धालु चल रहे थे। इस क्रम के पीछे सिर पर पवित्र मंगल कलश धारण किए महिलाएं दो-दो की कतार में बेहद अनुशासित ढंग से आगे बढ़ रही थीं। इसके बाद बैंड और फिर दी गई विशेष साडय़िों में सजी सामान्य इंद्राणियां तथा धोती-दुपट्टे में सजे सामान्य इंद्र दो-दो की कतार बनाकर मर्यादा पूर्वक चल रहे थे। पंजाब केसरी श्रीगंगानगर का ढोल बैंड माहौल में अनूठा उत्साह भर रहा था, जिसके पीछे सजी-धजी बग्गियों का सिलसिला शुरू हुआ। बग्गी क्रमांक 1 से 5 पर क्रमश: ईशान इंद्र अशोक, राजीव, मनोज सराफ, राकेश और नरेन्द्र सवार थे। बग्गी क्रमांक 6 से 8 पर सनत इंद्र आजाद, अरिहंत और महेन्द्र एनएफएल विराजमान थे, जबकि बग्गी क्रमांक 9 पर ब्रह्म इंद्र महेश और बग्गी क्रमांक 10 पर ब्रह्मोत्तर इंद्र हरीश अपने परिवार सहित जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।
शोभायात्रा के इस वैभवशाली क्रम में आगे बढ़ते हुए बग्गियों में विधि नायक देश राज, मनोज, संतोष, सतीश और सचिन सवार होकर चल रहे थे। इनके पीछे उज्जैन का प्रसिद्ध भस्म रामय्या बैंड अपनी अनोखी प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा था। धार्मिक प्रसंग के पात्रों में राजा श्रेयांश के रूप में बग्गी क्रमांक 16 से 20 पर क्रमश: राजकुमार, रमेशचंद, चंद्रनीश गोयल, संजीव और अनिल गरिमापूर्ण ढंग से विराजमान थे। इसके बाद राजा सोम की भूमिका में बग्गी क्रमांक 21 से 25 पर डॉ राहुल, संजय, राजकुमार, अरुण और भरतेश सवार होकर चल रहे थे। बग्गी क्रमांक 26 और 27 पर चक्रवर्ती भरत के रूप में राजेश और प्रदीप निकुंज का वैभव निखर रहा था, वहीं बग्गी क्रमांक 28 पर महाराज बाहुबली के रूप में संजय सवार थे। इसके पीछे शाढ़ौरा बैंड की धार्मिक धुनें बिखर रही थीं, जिसके ठीक पीछे विशेष रूप से तैयार की गईं विंटेज कारों का काफिला चल रहा था। विंटेज कार क्रमांक 29 से 33 में महायज्ञ नायक डॉ प्रीतेश, महावीर, तरुण, मनोज स्वराज और मनोज सवार थे, जो दर्शकों के लिए कौतूहल और आकर्षण का बड़ा केंद्र बनीं।
चल समारोह के अंतिम और सबसे वैभवशाली खंड में धनपति कुबेर इंद्र विनोद कुमार, संजय बजरंगढ़, संजय और अतुल अलग-अलग चार हाथियों पर चंवर ढुरवाते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसके पीछे हितेश सेमई बैंड की जुगलबंदी चल रही थी, जिसके बाद मुख्य धर्मचक्र वाहन और उसके पीछे चंवर लिए हुए 56 कुमारियां तथा अष्ट प्रतिहार्य के साथ अष्ट कुमारियां दिव्य छटा बिखेर रही थीं। शोभायात्रा के सबसे मुख्य आकर्षण के रूप में पांच विशाल ऐरावत हाथी चल रहे थे, जिन पर पांच सौधर्म इंद्र और भगवान के माता-पिता सवार थे। इनमें पहले ऐरावत हाथी पर सौधर्म भूपेश एवं भगवान के माता-पिता एसके जैन, दूसरे हाथी पर सौधर्म इंद्र अखिलेश एवं भगवान के माता-पिता अरविंद, तीसरे हाथी पर सौधर्म इंद्र शैलेन्द्र एवं भगवान के माता-पिता देवेंद्र, चौथे हाथी पर सौधर्म इंद्र धर्मेंद्र एवं भगवान के माता-पिता सुधीर और पांचवें ऐरावत हाथी पर सौधर्म इंद्र अनुज एवं भगवान के माता-पिता सुनील ससम्मान विराजमान थे। इस महा-आयोजन के सबसे अंत में हजारों की संख्या में साधर्मीजन जयकारे लगाते हुए भक्तिभाव के साथ चल रहे थे, जिससे पूरा गुना शहर आदिनाथ भगवान के भजनों से सराबोर नजर आया।
दोपहर में हुआ विधान
इस दौरान दोपहर में विधान, शाम को मुनिश्री का जिज्ञासा समाधान, उपरांत महाआरती हुई। वहीं रात्रि कालीन सत्र में रंगमंच पर सौधर्म इंद्र की सभा और गहन तत्व चर्चा का मंचन होगा। इसी दौरान सौधर्म इंद्र का आसन कम्पायमान होना, धनपति कुबेर का भव्य आगमन, अयोध्या नगरी पर रत्न वृष्टि होना तथा सर्वतोभद्र और स्वस्तिक के पावन आधार पर अलौकिक अयोध्या नगरी की सुंदर रचना का दृश्य जीवंत किया गया। इसके बाद अष्टकुमारियों द्वारा माता को भेंट समर्पण, देवियों द्वारा माता की अष्टयाम सेवा, तत्व चर्चा, माता द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों के दर्शन और मधुर संगीत-नृत्य के साथ गर्भ कल्याणक की अत्यंत महत्वपूर्ण आंतरिक क्रियाएं पूरी की जाएंगी।
गर्भकल्याणक उत्तरार्दध के कार्यक्रम आज
गुरुवार को गर्भकल्याणक उत्तरार्द्ध और मांगलिक संस्कार होंगे। इस दौरान गर्भकल्याणक की विशेष पूजन और शांति हवन संपन्न होंगे। दोपहर 1 बजे से सीमन्तनी क्रियाएं, महिलाओं द्वारा मांगलिक संगीत और माता की भव्य गोद भराई का कार्यक्रम अत्यंत उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से सुरुचिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां होंगी। दोपहर 3 बजे एक बार फिर मंगल घटयात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद नवनिर्मित जिन मंदिर की शुद्धि, जिन बेदी की शुद्धि, गगनचुंबी शिखर की शुद्धि और देव प्रतिमाओं का प्रतिष्ठा संस्कार आदि अत्यंत सूक्ष्मता के साथ किया जाएगा। रात्रि को राजा नाभिराय के राजदरबार का भव्य दृश्य सजेगा, जिसमें सभासदों द्वारा गंभीर विषयों पर चर्चा, महाराज नाभिराय का राजसभा में गरिमामयी आगमन तथा प्रधानमंत्री एवं सेनापति से राज्य की सुरक्षा व व्यवस्था के संबंध में चर्चा की जाएगी। इसी दौरान माता मरुदेवी का सभा में मंगल आगमन होगा, जहाँ राजा और माता के बीच सोलह स्वप्नों की चर्चा और उनके अलौकिक फलादेश को रेखांकित किया जाएगा। इस पूरे दृश्य के दौरान छप्पन कुमारियों द्वारा माता को भेंट समर्पण, तत्व चर्चा और प्रश्नोत्तर के कार्यक्रम होंगे, जिन्हें आकर्षक बनाने के लिए एलईडी स्क्रीन पर सोलह स्वप्नों का जीवंत और सजीव चित्रण प्रस्तुत किया जाएगा।