मेहका की बेटी हीमा जगेत ने रचा सफलता का नया अध्याय,12 साल की उम्र में बहन को खोया, परिवार की जिम्मेदारी संभाली; नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी, अब एमपीएससी से बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

नरेन्द्र राय रायसेन रायसेन/सिलवानी। छोटे से आदिवासी गांव मेहका की बेटी हीमा जगेत ने संघर्ष और मेहनत के दम पर सफलता की नई इबारत लिखी है। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और नौकरी के साथ पढ़ाई जैसी चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उनका चयन हुआ है। हीमा की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है। जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।हीमा जगेत के पिता रतनसिंह जगेत और माता संतोष रानी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा विद्या निकेतन सलैया में हुई। पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय बाड़ी के लिए हो गया। उन्होंने यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की।12-13 साल की उम्र में परिवार की जिम्मेदारी बढ़ी…युवती हीमा जब करीब 12-13 साल की थीं, तभी उनकी बड़ी बहन का निधन हो गया। इस घटना के बाद परिवार की जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका बढ़ गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे पढ़ाई पूरी करने के बाद लंबे समय तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। इसलिए 12वीं के बाद उनका लक्ष्य नौकरी हासिल कर परिवार को संभालने के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखना था।उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने रुरल डेवलपमेंट सर्विस सोसाइटी (RDSS) के सहयोग से भोपाल के एक कॉलेज में प्रवेश लिया। पढ़ाई के साथ ही उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। भोपाल में रहकर पढ़ाई करते हुए उन्होंने अपने भाई-बहनों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों में भी सहयोग किया।पांच साल की मेहनत के बाद मिली पहली सरकारी नौकरी….लगातार मेहनत और संघर्ष के करीब पांच साल बाद हीमा का चयन सहकारिता विभाग में उप अंकेक्षक के पद पर हुआ। उनकी पदस्थापना विंध्याचल भवन, भोपाल में हुई। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें अलग-अलग अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिला। इससे उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली समझने के साथ आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन भी मिला।नौकरी मिली, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं छोड़ी…सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी हीमा ने अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हिस्सा लिया। कई बार सफलता नहीं मिली।लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा।वर्ष 2025 में MPPSC के माध्यम से उनका चयन वाणिज्यिक कर विभाग (GST) में कराधान सहायक के पद पर हुआ। नौकरी के साथ पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। इस दौरान कार्यालय के सहकर्मियों ने भी उनका सहयोग किया।गरीबी को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया…युवती हीमा का कहना है कि उन्होंने अपनी आर्थिक परिस्थितियों को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा, “मैंने गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बल्कि उसे अपनी ताकत और मोटिवेशन का स्रोत बनाया। कठिन परिस्थितियों ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कार्यालय के सहकर्मियों और करीबी मित्रों को देती हैं। उनका कहना है कि सभी के निरंतर और निःस्वार्थ सहयोग ने संघर्ष के सफर को आसान बनाया।गांव की बेटी की सफलता से युवाओं को मिली प्रेरणा।मेहका जैसे छोटे से गांव से निकलकर हीमा जगेत ने शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सरकारी नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। लगातार प्रयासों के बादएमपीपीएससी से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन उनकी मेहनत का परिणाम है। उनकी कहानी ग्रामीण क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए अपना भविष्य संवारने का सपना देखते हैं।