ग्राम चिराखान में परंपरा का निर्वहन: इंद्रदेव को रिझाने के लिए सजी बाग रसोई, ग्रामीणों ने अच्छी बारिश और खुशहाली की मन्नत मांगी
संवाददाता जिला ब्यूरो ग्रामीण धार बदनावर से माही राठौड़*

*चिराखान ।गांव की सुख-समृद्धि, अमन-चैन और खेतों में खड़ी फसलों के लिए अच्छी वर्षा की कामना को लेकर ग्राम चिराखान में गुरुवार, 3 सितंबर को पारंपरिक ‘बाग रसोई’ का आयोजन किया गया। सुबह से ही पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और ग्रामीण पूरी श्रद्धा व नियम-निष्ठा के साथ इस आयोजन में शामिल हुए।परंपरा के अनुसार गांव की सभी महिलाओं ने सुबह स्नान कर गांव के बाहर स्थित बगीचे ,एवं अपने खेतो पर एक साथ चूल्हे बनाए। लकड़ी के चूल्हे पर दाल, बाटी, चूरमा, खीर-पूरी और कढ़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए गए। रसोई बनाते समय महिलाएं इंद्रदेव के भजन गाती रहीं। इस दौरान पुरुषों ने पूजा की व्यवस्था संभाली।रसोई तैयार होने के बाद किसानो द्वारा विधि-विधान से भगवान इंद्रदेव की पूजा-अर्चना की गई। ग्राम के बुजुर्गों ने बताया कि यह सदियों पुरानी परंपरा है। जब बारिश की कमी होती है या फसलों को पानी की अधिक आवश्यकता होती है, तब गांव के लोग एकजुट होकर बाग में रसोई बनाकर इंद्रदेव को प्रसन्न करते हैं। ऐसी मान्यता है कि सामूहिक प्रार्थना से इंद्रदेव प्रसन्न होकर अच्छी वर्षा करते हैं।*एक साथ बैठकर किया प्रसाद ग्रहण*पूजा के बाद बने हुए भोजन का पहले इंद्रदेव को भोग लगाया गया, फिर सभी ग्रामवासियों ने एक पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। छोटे बच्चों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।अंत में सभी ने गांव में सुख-शांति, खुशहाली और किसानों की फसल अच्छी होने के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना की।