जमीन बचाओ जनसभा में महेश पटेल जमीन बचाओ जनसभा में महेश पटेल का भाजपा पर हमला*बोले- भाषण नहीं, कागज और सरकारी आदेश चाहिए; आदिवासी की जमीन पर दबाव बर्दाश्त नहीं

*जिला ब्यूरो अलीराजपुर से महेश गणावा की रिपोर् मो =9179189851* चंद्रशेखर आजाद नगर में आदिवासी समाज की जनसभा के बाद रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, खनिज ब्लॉक, पेसा एक्ट और खाद संकट पर सरकार से मांगा जवाबचंद्रशेखर आजाद नगर, 2 सितंबर। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल ने बुधवार को चंद्रशेखर आजाद नगर के मंडी ग्राउंड में आयोजित जमीन बचाओ जनसभा को संबोधित करते हुए खनिज ब्लॉक, आदिवासी जमीन, पेसा कानून, ग्रामसभा, किसानों की खाद समस्या और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार एवं भाजपा नेताओं पर जमकर निशाना साधा।जनसभा के बाद आदिवासी समाज एवं ग्रामीणों ने रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी, चंद्रशेखर आजाद नगर के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया निरस्त करने, ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए बनाए जा रहे दबाव को रोकने, पेसा एक्ट का पालन सुनिश्चित करने तथा किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई।महेश पटेल ने कहा कि यह लड़ाई कांग्रेस या भाजपा की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की जल, जंगल और जमीन की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी जमीन, खेती, संस्कृति, धार्मिक स्थलों और पुरखों की विरासत की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष कर रहा है।‘प्री-ऑक्शन’ के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोपमहेश पटेल ने कहा कि पिछले कई दिनों से खनिज ब्लॉक के मामले में जनता को ‘प्री-ऑक्शन’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझाया जा रहा है, जबकि वे सरकार के ही दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात ग्रामीणों के सामने रख रहे हैं।उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार के भू-विज्ञान एवं खनन संचालनालय द्वारा जारी प्रक्रिया में खेरिया लाइमस्टोन ब्लॉक, जिला आलीराजपुर, खनिज चूना पत्थर तथा कम्पोजिट लाइसेंस (CL) का उल्लेख है।पटेल के अनुसार टेंडर दस्तावेज की कीमत 5 लाख रुपये, जीएसटी अतिरिक्त, दस्तावेज खरीदने की अंतिम तारीख 4 नवंबर 2025, ऑनलाइन नीलामी की तारीख 9 दिसंबर 2025 तथा बोली जमा करने की अंतिम तारीख 16 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे निर्धारित की गई थी।उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार ने टेंडर दस्तावेज, उसकी कीमत और नीलामी की तारीखें निर्धारित कर दी थीं तो फिर जनता को केवल ‘प्री-ऑक्शन’ के नाम पर क्यों गुमराह किया जा रहा है?खनिज ब्लॉकों से जुड़े ग्रामों को लेकर चिंतापटेल ने कहा कि बलदमुग, बड़ी खट्टाली, खेरवा, छोटी खट्टाली, डाबड़ी, नेहतड़ा, गुडाबड़ा, उबलड, चगदी, बेटवासा, कोसदुना सहित अन्य ग्रामों में खनिज ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया पहले से प्रचलन में रही है।उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के विरोध, धरना, ज्ञापन और विधानसभा में विधायक द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान कहा गया था

कि किसी भी आदिवासी की जमीन का एक इंच भी उनसे नहीं छीना जाएगा।पटेल ने कहा कि इसके बावजूद शासन द्वारा लगातार पत्र जारी किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि चूना पत्थर से जुड़े माथना, कुहिवाव, भूरियाकुवा, सेजावाड़ा, अमनकुआं, कांसट, खोरियामाली, बड़ी करेटी, सांदा, मालवेली सहित अन्य ग्रामों तथा मैगनीज से जुड़े मोटाउमर, सेवड़, बड़ी जुवारी, छोटी जुवारी, सेमलाया, उबगारी, पनेरी सहित अन्य ग्रामों को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।‘विरोध पहले से है तो फिर बार-बार पत्र क्यों?’महेश पटेल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन शासन के पत्रों का हवाला देकर ग्राम पंचायतों से खनिज नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए दबाव बना रहा है और प्रस्ताव की प्रतियां मांगी जा रही हैं।उन्होंने सवाल किया कि जब ग्रामीण पहले से ही खनिज नीलामी का विरोध कर रहे हैं, धरना दे चुके हैं, ज्ञापन दे चुके हैं और विधानसभा में मामला उठ चुका है, तो फिर अब दोबारा कार्रवाई क्यों की जा रही है?उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने का दबाव बनाए जाने से ग्रामीणों में असंतोष और चिंता बढ़ रही है।ग्रामसभा को लेकर सरकार से जवाब मांगामहेश पटेल ने माथना, कुहिवाव, भूरियाकुवा, सेजावाड़ा, अमनकुआं, कांसट, खोरियामाली, बड़ी करेटी, सांदा, मालवेली सहित प्रभावित बताए जा रहे गांवों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या इन गांवों में ग्रामसभा बुलाई गई थी?उन्होंने कहा कि यदि ग्रामसभा हुई है तो सरकार और प्रशासन यह स्पष्ट करें कि ग्रामसभा कब हुई, किस ग्रामसभा में हुई, प्रस्ताव क्रमांक क्या है और उसकी प्रमाणित प्रति जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही है।पटेल ने कहा कि आलीराजपुर अनुसूचित क्षेत्र है और यहां पेसा कानून लागू है। ऐसे में ग्रामसभा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरी प्रक्रिया और ग्रामसभा से जुड़े दस्तावेज जनता के सामने रखने की मांग की।‘जल, जंगल, जमीन, बाबा देव और गाता हमारी विरासत’महेश पटेल ने कहा कि ग्रामीण जनता परेशान है। उन्हें अपनी जल, जंगल, जमीन, बाबा देव, गाता तथा जीवनभर की पूंजी और पुरखों की विरासत छिनने का डर सता रहा है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, संस्कृति, परंपरा, धार्मिक आस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है।उन्होंने कहा, “हम आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन के मालिक हैं। यह हमारे पुरखों की विरासत है। हम मर जाएंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।”पेसा एक्ट के पालन पर सवालपटेल ने कहा कि आलीराजपुर जिला अनुसूचित क्षेत्र है और यहां पेसा एक्ट लागू है, लेकिन जिले में पेसा एक्ट का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ग्रामसभा और आदिवासी समाज के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार का दबाव बनाकर ग्राम पंचायत या ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित करवाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।नागर सिंह चौहान पर तीखा हमलामहेश पटेल ने कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि नागर सिंह चौहान वास्तव में आदिवासी समाज और किसानों की जमीन बचाना चाहते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के सामने यह मुद्दा उठाकर लिखित निरस्तीकरण आदेश लेकर आना चाहिए।उन्होंने कहा, “अगर ताकत है तो सरकार से आदेश लेकर आइए, जनता के सामने रखिए और हम भी आपके साथ खड़े होंगे।”पटेल ने सवाल किया कि यदि मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार तक नागर सिंह चौहान की पहुंच है तो फिर खनिज ब्लॉक के मामले में सरकार से स्पष्ट निर्णय क्यों नहीं कराया जा रहा है?माधु डावर से भी मांगा जवाबमहेश पटेल ने भाजपा नेता माधु डावर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने माथना में जमीन से जुड़े पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीणों ने जमीन को लेकर आपत्ति जताई थी और कलेक्टर को भी अपनी जमीन नहीं देने की बात कही थी।पटेल ने कहा कि वे इस मामले में ग्रामीणों के साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी आदिवासी किसानों की जमीन के मुद्दे पर आवाज उठाते रहेंगे।उन्होंने माधु डावर से सवाल किया कि यदि वे किसानों के पक्ष में हैं तो खनिज ब्लॉक के मामले में सरकार से स्पष्ट और लिखित आदेश क्यों नहीं लेकर आते?दीपक चौहान और विशाल रावत पर भी सवालमहेश पटेल ने दीपक चौहान और विशाल रावत का नाम लेते हुए भाजपा के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान आने का दावा किया।उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेता वास्तव में इस मामले को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें बयानबाजी करने के बजाय एक साथ बैठकर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।पटेल ने कहा कि एक तरफ भाजपा के कुछ नेता जमीन बचाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।अनिता चौहान को लेकर भी सवालमहेश पटेल ने अनिता चौहान को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो लोग जनता के बीच राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं, उन्हें प्रभावित गांवों में जाकर ग्रामीणों की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन का सवाल किसी व्यक्ति या परिवार की राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।तीन सरपंचों की जांच पर सवालपटेल ने कहा कि उन्हें जानकारी है कि मंत्री नागर सिंह चौहान की ओर से तीन सरपंचों की टीम से जांच कराने की बात सामने आई है, जिसमें दो सरपंच जोबट ब्लॉक और एक सरपंच सोंडवा ब्लॉक से बताए गए हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े क्षेत्र और इतने गांवों से जुड़े मामले की जांच यदि की जा रही है तो उसे व्यापक और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि जांच में प्रभावित ग्रामीणों, ग्रामसभाओं और उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों को शामिल किया जाना चाहिए।‘वेबसाइट से आलीराजपुर का नाम हटाओ या स्थिति स्पष्ट करो’महेश पटेल ने खनिज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार का कहना है कि यह केवल अफवाह है तो वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी को स्पष्ट क्यों नहीं किया जाता?उन्होंने नागर सिंह चौहान और सांसद से मांग की कि खनिज मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध संबंधित जानकारी की स्थिति स्पष्ट कराई जाए।पटेल ने कहा, “अगर यह गलत है तो सरकार लिखित में बताए कि गलत है। अगर सही है तो प्रक्रिया रोकने का आदेश जारी करे।”चूना पत्थर, मैंगनीज और ग्रेफाइट ब्लॉकों का मुद्दामहेश पटेल ने कहा कि क्षेत्र में केवल चूना पत्थर ही नहीं, बल्कि मैंगनीज और ग्रेफाइट से जुड़े खनिज ब्लॉकों की जानकारी भी सामने आ रही है।उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें, बल्कि सरकारी दस्तावेज देखें और अपनी ग्रामसभा की भूमिका समझें।75गांवों को लेकर जताई चिंतापटेल ने कहा कि इस मामले को केवल एक-दो गांवों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने 75 गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि खनन और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बड़े क्षेत्र में आगे बढ़ती है तो उसका असर पूरे इलाके पर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि सरकार बड़े अस्पताल, स्कूल और रोजगार की बातें कर सकती है, लेकिन सबसे पहले यह बताना चाहिए कि जिन लोगों की जमीन जाएगी, उनका भविष्य क्या होगा?गुजरात, सिंगरौली सहित अन्य क्षेत्रों का उदाहरणमहेश पटेल ने गुजरात, सिंगरौली सहित अन्य क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासी परिवारों के विस्थापन के बाद उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि सरकार को पहले से सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास के नाम पर स्थानीय आदिवासी परिवार अपनी जमीन और आजीविका से वंचित न हों।‘यह कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं, आदिवासी समाज की लड़ाई’भाजपा द्वारा कांग्रेस पर भ्रम फैलाने के आरोपों पर महेश पटेल ने कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाया है।उन्होंने कहा कि वे आदिवासी विकास परिषद और आदिवासी समाज के माध्यम से जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि यदि भाजपा का कोई नेता भी आदिवासी समाज की जमीन बचाने के लिए ईमानदारी से आगे आता है तो वे उसके साथ खड़े होंगे।“यह कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई नहीं है। यह हमारे समाज की जमीन, खेती और भविष्य की लड़ाई है।”किसानों की खाद समस्या पर भी सरकार को घेरामहेश पटेल ने किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण आज अन्नदाता किसान काफी परेशानी से जूझ रहा है।खाद वितरण प्रणाली के अंतर्गत किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने के कारण किसान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और पैदावार कम होने की प्रबल संभावना है। इससे किसान अपने परिवार के भरण-पोषण और जीवन-यापन को लेकर चिंता में हैं।पटेल ने कहा कि शासन कभी टोकन व्यवस्था चालू करता है और कभी बंद कर देता है, जिससे किसान परेशान हो रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार की गलत एवं अव्यवस्थित प्रणाली बताया।उन्होंने मांग की कि खाद वितरण प्रणाली में टोकन व्यवस्था निरस्त कर किसानों को आधार एवं खाता-खसरा नकल के आधार पर तत्काल उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाए।विकासखंडवार पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांगमहेश पटेल ने कहा कि किसानों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए शासन द्वारा विकासखंडवार पर्याप्त मात्रा में खाद का आवंटन, भंडारण एवं वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।उन्होंने कहा कि खाद वितरण व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया जाए तथा किसानों को खाद के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।बिजली की समस्या पर भी सरकार को घेराजनसभा में महेश पटेल ने क्षेत्र की बिजली समस्या को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पहले से बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं और सरकार को बड़े-बड़े प्रोजेक्टों की बातें करने से पहले गांवों की मूलभूत समस्याओं का समाधान करना चाहिए।‘पुराना निरस्तीकरण आदेश जनता को दिखाओ’महेश पटेल ने माधु डावर के कथित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जोबट से संबंधित किसी ब्लॉक को निरस्त किए जाने की बात कही गई थी।पटेल ने कहा कि यदि ऐसा कोई आदेश जारी हुआ था तो उसे जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए।उन्होंने कहा, “अगर पहले ब्लॉक निरस्त हुआ था तो उसका आदेश जनता को दिखाइए। और अगर आज यह प्रक्रिया गलत है तो सरकार से इसका निरस्तीकरण आदेश लेकर आइए।”रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापनजनसभा के बाद आदिवासी समाज एवं ग्रामीणों ने रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी, चंद्रशेखर आजाद नगर के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में खनिज ब्लॉकों की नीलामी की कार्रवाई निरस्त करने, ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए बनाए जा रहे दबाव को रोकने, पेसा एक्ट के प्रावधानों का पालन करने तथा आदिवासी ग्रामीणों की जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।इसके साथ ही किसानों की खाद समस्या को लेकर भी मांग रखी गई कि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए तथा विकासखंडवार पर्याप्त मात्रा में खाद का आवंटन, भंडारण एवं वितरण सुनिश्चित किया जाए।‘हमें भाषण नहीं, कागज और आदेश चाहिए’जनसभा के अंत में महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं लड़ रहा है। जनता को केवल बयान और भाषण नहीं चाहिए।उन्होंने कहा—“हमें भाषण नहीं, कागज चाहिए।हमें सरकारी दस्तावेज चाहिए।हमें ग्रामसभा का प्रस्ताव चाहिए।हमें जांच की रिपोर्ट चाहिए।और अगर प्रक्रिया रोकनी है तो सरकार का लिखित आदेश चाहिए।”उन्होंने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि आदिवासियों की जमीन नहीं ली जाएगी तो इसका लिखित आदेश जनता के सामने रखा जाए।यदि खनिज ब्लॉक की प्रक्रिया नहीं चल रही है तो संबंधित सरकारी वेबसाइट और दस्तावेजों में स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि ग्रामसभा की सहमति ली गई है तो उसके प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक की जाए।आंदोलन की चेतावनीमहेश पटेल ने कहा कि शासन-प्रशासन तत्काल खनिज ब्लॉकों की नीलामी की कार्रवाई को निरस्त करे, ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए बनाया जा रहा दबाव बंद करे और अनुसूचित क्षेत्र में पेसा कानून के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करे।साथ ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराकर वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदिवासी ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो आदिवासी ग्रामीण जन एवं किसान उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।ल का भाजपा पर हमलाबोले- भाषण नहीं, कागज और सरकारी आदेश चाहिए; आदिवासी की जमीन पर दबाव बर्दाश्त नहींचंद्रशेखर आजाद नगर में आदिवासी समाज की जनसभा के बाद रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, खनिज ब्लॉक, पेसा एक्ट और खाद संकट पर सरकार से मांगा जवाबचंद्रशेखर आजाद नगर, 2 सितंबर। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल ने बुधवार को चंद्रशेखर आजाद नगर के मंडी ग्राउंड में आयोजित जमीन बचाओ जनसभा को संबोधित करते हुए खनिज ब्लॉक, आदिवासी जमीन, पेसा कानून, ग्रामसभा, किसानों की खाद समस्या और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार एवं भाजपा नेताओं पर जमकर निशाना साधा।जनसभा के बाद आदिवासी समाज एवं ग्रामीणों ने रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी, चंद्रशेखर आजाद नगर के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया निरस्त करने, ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए बनाए जा रहे दबाव को रोकने, पेसा एक्ट का पालन सुनिश्चित करने तथा किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई।महेश पटेल ने कहा कि यह लड़ाई कांग्रेस या भाजपा की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की जल, जंगल और जमीन की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी जमीन, खेती, संस्कृति, धार्मिक स्थलों और पुरखों की विरासत की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष कर रहा है।‘प्री-ऑक्शन’ के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोपमहेश पटेल ने कहा कि पिछले कई दिनों से खनिज ब्लॉक के मामले में जनता को ‘प्री-ऑक्शन’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझाया जा रहा है, जबकि वे सरकार के ही दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात ग्रामीणों के सामने रख रहे हैं।उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार के भू-विज्ञान एवं खनन संचालनालय द्वारा जारी प्रक्रिया में खेरिया लाइमस्टोन ब्लॉक, जिला आलीराजपुर, खनिज चूना पत्थर तथा कम्पोजिट लाइसेंस (CL) का उल्लेख है।पटेल के अनुसार टेंडर दस्तावेज की कीमत 5 लाख रुपये, जीएसटी अतिरिक्त, दस्तावेज खरीदने की अंतिम तारीख 4 नवंबर 2025, ऑनलाइन नीलामी की तारीख 9 दिसंबर 2025 तथा बोली जमा करने की अंतिम तारीख 16 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे निर्धारित की गई थी।उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार ने टेंडर दस्तावेज, उसकी कीमत और नीलामी की तारीखें निर्धारित कर दी थीं तो फिर जनता को केवल ‘प्री-ऑक्शन’ के नाम पर क्यों गुमराह किया जा रहा है?खनिज ब्लॉकों से जुड़े ग्रामों को लेकर चिंतापटेल ने कहा कि बलदमुग, बड़ी खट्टाली, खेरवा, छोटी खट्टाली, डाबड़ी, नेहतड़ा, गुडाबड़ा, उबलड, चगदी, बेटवासा, कोसदुना सहित अन्य ग्रामों में खनिज ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया पहले से प्रचलन में रही है।उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के विरोध, धरना, ज्ञापन और विधानसभा में विधायक द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान कहा गया था कि किसी भी आदिवासी की जमीन का एक इंच भी उनसे नहीं छीना जाएगा।पटेल ने कहा कि इसके बावजूद शासन द्वारा लगातार पत्र जारी किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि चूना पत्थर से जुड़े माथना, कुहिवाव, भूरियाकुवा, सेजावाड़ा, अमनकुआं, कांसट, खोरियामाली, बड़ी करेटी, सांदा, मालवेली सहित अन्य ग्रामों तथा मैगनीज से जुड़े मोटाउमर, सेवड़, बड़ी जुवारी, छोटी जुवारी, सेमलाया, उबगारी, पनेरी सहित अन्य ग्रामों को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।‘विरोध पहले से है तो फिर बार-बार पत्र क्यों?’महेश पटेल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन शासन के पत्रों का हवाला देकर ग्राम पंचायतों से खनिज नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए दबाव बना रहा है और प्रस्ताव की प्रतियां मांगी जा रही हैं।उन्होंने सवाल किया कि जब ग्रामीण पहले से ही खनिज नीलामी का विरोध कर रहे हैं, धरना दे चुके हैं, ज्ञापन दे चुके हैं और विधानसभा में मामला उठ चुका है, तो फिर अब दोबारा कार्रवाई क्यों की जा रही है?उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने का दबाव बनाए जाने से ग्रामीणों में असंतोष और चिंता बढ़ रही है।ग्रामसभा को लेकर सरकार से जवाब मांगामहेश पटेल ने माथना, कुहिवाव, भूरियाकुवा, सेजावाड़ा, अमनकुआं, कांसट, खोरियामाली, बड़ी करेटी, सांदा, मालवेली सहित प्रभावित बताए जा रहे गांवों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या इन गांवों में ग्रामसभा बुलाई गई थी?उन्होंने कहा कि यदि ग्रामसभा हुई है तो सरकार और प्रशासन यह स्पष्ट करें कि ग्रामसभा कब हुई, किस ग्रामसभा में हुई, प्रस्ताव क्रमांक क्या है और उसकी प्रमाणित प्रति जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही है।पटेल ने कहा कि आलीराजपुर अनुसूचित क्षेत्र है और यहां पेसा कानून लागू है। ऐसे में ग्रामसभा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरी प्रक्रिया और ग्रामसभा से जुड़े दस्तावेज जनता के सामने रखने की मांग की।‘जल, जंगल, जमीन, बाबा देव और गाता हमारी विरासत’महेश पटेल ने कहा कि ग्रामीण जनता परेशान है। उन्हें अपनी जल, जंगल, जमीन, बाबा देव, गाता तथा जीवनभर की पूंजी और पुरखों की विरासत छिनने का डर सता रहा है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, संस्कृति, परंपरा, धार्मिक आस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है।उन्होंने कहा, “हम आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन के मालिक हैं। यह हमारे पुरखों की विरासत है। हम मर जाएंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।”पेसा एक्ट के पालन पर सवालपटेल ने कहा कि आलीराजपुर जिला अनुसूचित क्षेत्र है और यहां पेसा एक्ट लागू है, लेकिन जिले में पेसा एक्ट का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ग्रामसभा और आदिवासी समाज के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार का दबाव बनाकर ग्राम पंचायत या ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित करवाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।नागर सिंह चौहान पर तीखा हमलामहेश पटेल ने कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि नागर सिंह चौहान वास्तव में आदिवासी समाज और किसानों की जमीन बचाना चाहते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के सामने यह मुद्दा उठाकर लिखित निरस्तीकरण आदेश लेकर आना चाहिए।उन्होंने कहा, “अगर ताकत है तो सरकार से आदेश लेकर आइए, जनता के सामने रखिए और हम भी आपके साथ खड़े होंगे।”पटेल ने सवाल किया कि यदि मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार तक नागर सिंह चौहान की पहुंच है तो फिर खनिज ब्लॉक के मामले में सरकार से स्पष्ट निर्णय क्यों नहीं कराया जा रहा है?माधु डावर से भी मांगा जवाबमहेश पटेल ने भाजपा नेता माधु डावर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने माथना में जमीन से जुड़े पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीणों ने जमीन को लेकर आपत्ति जताई थी और कलेक्टर को भी अपनी जमीन नहीं देने की बात कही थी।पटेल ने कहा कि वे इस मामले में ग्रामीणों के साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी आदिवासी किसानों की जमीन के मुद्दे पर आवाज उठाते रहेंगे।उन्होंने माधु डावर से सवाल किया कि यदि वे किसानों के पक्ष में हैं तो खनिज ब्लॉक के मामले में सरकार से स्पष्ट और लिखित आदेश क्यों नहीं लेकर आते?दीपक चौहान और विशाल रावत पर भी सवालमहेश पटेल ने दीपक चौहान और विशाल रावत का नाम लेते हुए भाजपा के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान आने का दावा किया।उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेता वास्तव में इस मामले को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें बयानबाजी करने के बजाय एक साथ बैठकर सरकार प