भगवान पशुपतिनाथ की सुन्दर नगरी में मचा आहाकार

।ठा, अरविंद सिंह लोधी, गब्बर एस/जे/न्यूज़/एम पी पूंजापूरा से।फूल सबको बाटकर पत्थर के हो गए। पल पल सामान्य जीवन जी रहा की आने वाली होनी से बेखबर नेपाल का रासुवा जिला अचानक प्रलय की गोद में समा गया कोई कुछ समझ पाता कोई कुछ बोल पाता बचने कि कोशिश तो वीडियो में दिखाई दे रही है लेकिन मौत को इतनी जल्दी पड़ी हैं की किसी को बचाने का रास्ता नहीं दिया जो भी आया दावानल मैं समाता चला गया क्या बच्चे क्या बूढ़े क्या बुजुर्ग क्या महिला क्या युवा किसी को कुछ मौका नहीं मिला और एक अज्ञात बीहड़ में समाते चले गए बीहड़ भी इतना घना की जिससे लौट कर आना कोरी कल्पना मात्र,, सावन के उतरने में कुछ पल बाकी थे भगवान पशुपतिनाथ कि सुन्दर नगरी नेपाल एक ऐसा वज्रापात सहन कर रहा है जिसे निकलने में शताब्दी लग जाएगी विज्ञान के बढ़ते चरणों ने हालांकि मनुष्य को मंगल तक जरूर पहुंचाया है लेकिन ऐसी प्राकृतिक अमंगलकारी घटनाओं को रोकने का ना होने का कोई बंदोबस्त का सूत्र अभी भी योजना से दूर दिखाई देता है ईश्वर की बनाई हुई सृष्टि परमेश्वर की दी हुई दृष्टि अभी इतनी मजबूत नहीं हो पा रही है ईश्वर आपकी बनाई हुई इस खूबसूरत प्राकृतिक संरचना के संचालन में आपकी सर्वशक्तिमान इच्छा दृष्टि पर किसी प्रकार का कोई प्रश्नचिन्ह नहीं हे परंतु फिर भी इस प्रकार की अनहोनी घटनाओं में समाज को और राष्ट्र को एक शून्य में धकेल दिया जाता है और वह यह हे कि ईश्वर की मर्जी पर किसी का जोर नहीं चलता वह जिसको चाहे बना दे या मिटा दे मनुष्य सर्वश्रेष्ठ पाना चाहता हे लेकिन आपकी बनाई हुई सृष्टि पर केवल आपकी एकात्मक सत्ता सुशोभित होती है किस बात से कोई गुरेज भी नहीं है प्रभु सर्वशक्ति मते परमात्मने का महामंत्र जपने वाली इस कोम पर रहम कर, रहम कर उन मूक बधिर प्राणी मात्र पर जो अपनी पीड़ा संकेत से देते हैं जरूर पर वाणी से कुछ कह नहीं सकते रहम करो प्रभु प्रकृति की उन शिलालेखो पर जिसके अंश अंश में आपका प्रभाव है। रात आज की भी गुजर जाएगी लेकिन कल का सुबह जो भयानक दृश्य दिखाई देगा वह निश्चित रूप से तुम्हारे हलाहल पीने की याद दिला देगा ,,,, प्रभु 84 लाख योनियों के बड़े कुनबे में बुद्धि और विवेक में सर्वश्रेष्ठ और सर्वश्रेष्ठता का तमगा पहना मनुष्य अपने मान सम्मान और स्वाभिमान को कोसों दूर रखकर क्षमा याचना की मुद्रा में एक बार नहीं हजार बार यहीं विनती करता है,,,, प्रभु जीवन तुमने दिया है जीने का सहारा भी तुम देना,,,, तेरी इच्छा पर किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है,,, पर पीड़ा में दुःख की अनुभूति महसूस करने का यह गुण अपने आप में अद्भुत है इसे हमारी झोली से कभी मत छीनना,,,,, प्रभु आपकी माया अपरंपार है जिस पर किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं है,,, जिन लोगों का दामन हमसे छूटा वह ईश्वर तुल्य हो गए हैं जो रह गए हैं उनके पास अरदास के अलावा कुछ नहीं है,,,,होने थे जिनके खेल मुकद्दर के हो गए,,,,हम टूटी हुई नाव लेकर समंदर के हो गए ,,,,खुशबू हमारे हाथों को छुकर गुजर गई,,,हम फूल सबको बताकर पत्थर के हो गए नेपाल की भीषण त्रासदी मैं अपने जान माल से हाथ धोने वाले हर अनजान शख्स को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏🙏🙏