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Burhanpur

अगस्त क्रांति दिवस

By Mohan Sharma
August 9, 2026 3 Min Read
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रमाकांत मोरे *अगस्त माह भारत के स्वतंत्रता इतिहास में एक विशेष महत्व रखता है। 9 अगस्त 1925 को उत्तरप्रदेश के प्रमुख शहर लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन के नजदीक क्रांतिकारीयों ने अंग्रेजों का सरकारी खजाना लूटकर ऐतिहासिक काकोरी काण्ड को अंजाम दिया था। प्रमुख क्रांतिकारी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेन्द्रनाथ लाहोड़ी,और ठाकुर रोशनसिंह का उद्देश्य हथियार खरीदने के लिये ब्रिटिश सरकार के खजाने की राशि प्राप्त करना था। काकोरी के वीरों की गूंज आज भी स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को विचलित कर देती है। इन्ही अमर वीर शहीदों की देशभक्ति, त्याग,साहस और संघर्ष ने स्वतंत्रता की लौ प्रज्वलित की थी। ब्रिटिश सरकार द्वारा चारों शहीदों को फांसी तथा इनके अन्य 16 साथियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।**भारत छोड़ो आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा बम्बई के गोवालिया टैंक मैदान से “करेगे या मरेंगे” के संदेश से देश भर में भारत माता की आजादी के आंदोलन प्रारंभ हो गये थे।**अंग्रेजो भारत छोड़ो* की चेतावनी के साथ ही *करो या मरो* का दृढ़ निश्चय करने के लिए *9 अगस्त 1942* भारत को महात्मा गांधी ने “भारत छोड़ो आंदोलन” का बिगुल फूंका था।”अंग्रेजों भारत छोड़ो”_। उसी रात अंग्रेज सरकार ने शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया। आंदोलन के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी, सरदार पटेल, मौलाना आजाद,डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभी को ही गिरफ्तार कर लिया गया।अरुणा आसफ अली ने मुंबई में तिरंगा फहराकर आंदोलन को जीवित रखा। *मातंगिनी हजरा और कनकलता बरुआ ने बंगाल और असम में नेतृत्व करते हुए शहादत* दी। *जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया,अच्युत पटवर्धन* भूमिगत होकर पूरे देश में आंदोलन चलाते रहे। आंदोलन के चलते 1000+ लोग शहीद हुए और 60,000 से अधिक लोग जेल गए। इस आंदोलन ने क्रान्तिकारियों को प्रेरित किया, इस बीच 1942 में ही *सुभाष चंद्र बोस बर्लिन में आजाद हिंद रेडियो* की स्थापना कर चुके थे, *आजाद हिन्द रेडियो से करो या मरो का नारा रातों-रात देश के हर गली कूचे तक गूंज उठा था*, पूरे देश में विद्रोह की आग फैल गई थी, *अंग्रेजो भारत छोड़ो की हुंकार के साथ क्रान्तिकारियों के अन्दर भारत को दासता से मुक्त कराने की प्रचंड इच्छा ने क्रान्ति का रूप ले लिया था*, यही क्रान्ति अगस्त क्रान्ति के रूप में जानी जाती है, 8 अगस्त 1942 की रात्रि क्रान्तिकारियों ने स्थान-स्थान पर यूनियन जैक उतार कर तिरंगा झंडा फहराने की योजनाओं को अन्तिम रूप दिया। *सुबह से ही आजादी का बिगुल फूंक दिया गया। देशभर में अनगिनत क्रान्तिकारियों को जेल में डाल दिया गया, असहनीय यातनाएं दी गईं।* *देश अगस्त क्रान्ति के अवसर पर विविध कार्यक्रमों के माध्यम से अपने पूर्वजों के कर्तृत्व का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि समर्पित करता है।* *बुरहानपुर में काकोरी कांड तथा अगस्त क्रान्ति दिवस पर स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गोपालदास गुजराती की अगुवाई, स्वतंत्रता सेनानी वीरांगना निर्मला बाई शत्रुघ्न चौहान की अध्यक्षता,तरूण परमानंद लाड़ एवं आशिष किशोर पाटिल के मार्गदर्शन में महिला शक्ति रेणु सुनील गुजराती तथा सपना आशीष पाटिल के नेतृत्व में भारत माता के चित्र, स्वतंत्रता सेनानी शिलालेख और पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम संपन्न हुआ।* उपस्थित सभी ने एक स्वर में *राष्ट्रगीत वंदे मातरम तथा राष्ट्रगान जन- गण-मन का गायन कर भारत माता की जय,स्वतंत्रता सेनानी अमर रहे*, के नारे लगाए गए। *बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना वंदे- मातरम आजादी आंदोलन का जोशीला नारे था इसके 150 वर्ष पूर्ण होने पर का गगनभेदी जय घोष* लगायें। *स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवारजन दिनेश शत्रुघ्न चौहान, महेंद्र सिंह भरतसिंह राजपूत,शिल्पा जयकुमार दलाल,गणेश शत्रुघ्न चौहान, सुलभा किशोर पाटिल,उषा दत्तू दिवेकर,जय कुमार मोहनलाल दलाल,अजय सातपुते विमला विनोद दलाल,ऋषिकेशसिंह गजेंद्र सिंह राजपूत एवं नन्हे उत्तराधिकारी भूमिक आशीष पाटिल,विराज गौरव शाह* के साथ-साथ गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे!*जयकुमार दलाल एवं गणेश शत्रुघ्न चौहान द्वारा सभी से अपने-अपने घरों पर तिरंगा ध्वज फहराने का संकल्प लिया गया!*

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