सांसद का मेघनाथ घाट दौरा विवादों में: निसरपुर के डूब प्रभावितों का फूटा गुस्सा, सांसद की अनदेखी और ‘क्रेडिट वॉर’ से गरमाई राजनीति

निसरपुर | गोपाल तेलंगे कुक्षी क्षेत्र के मेघनाथ घाट पर अंतरप्रांतीय क्रूज सेवा के निरीक्षण के लिए पहुंचीं धार सांसद सावित्री ठाकुर का दौरा विवादों में घिर गया है। बेहद करीब आकर भी निसरपुर के डूब प्रभावितों की सुध न लेने से जहां ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, वहीं स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी ने संगठन के भीतर भी खींचतान की स्थिति पैदा कर दी है।1. वादों पर फिरा पानी: पास आकर भी दूर रहीं सांसदरविवार को कुक्षी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सांसद सावित्री ठाकुर सीधे मेघनाथ घाट पहुंची थीं, जहां उन्होंने जल्द शुरू होने वाली क्रूज सर्विस के निर्माण व विकास कार्यों का जायजा लिया।जैसे ही सांसद के आगमन की खबर फैली, निसरपुर के डूब प्रभावित परिवारों में आस जगी थी कि सांसद इस बार उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालेंगी। हालांकि, निरीक्षण खत्म होते ही सांसद बिना निसरपुर गए सीधे जिले के लिए रवाना हो गईं, जिससे ग्रामीणों की उम्मीदें एक बार फिर टूट गईं।अधूरी घोषणाएं और सवाल: ग्रामीणों का कहना है कि सांसद ने अपने पिछले दौरे पर मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों से सीधी बात कर डूब प्रभावितों की समस्याओं के शीघ्र निराकरण का वादा किया था। लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया।2. अपनों की उपेक्षा: स्थानीय कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोषसांसद के इस दौरे ने स्थानीय संगठन के भीतर भी असंतोष बढ़ा दिया है। आरोप है कि निसरपुर के युवा व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सांसद के आगमन की भनक तक नहीं लगने दी गई और वे केवल कुछ गिने-चुने समर्थकों के साथ मेघनाथ घाट पहुंचीं।कार्यकर्ताओं की व्यथा: नाम न छापने की शर्त पर कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि क्षेत्र में आने से पहले स्थानीय संगठन को सूचित किया जाना चाहिए था। कार्यकर्ताओं की निष्ठा की अनदेखी करना पार्टी हित में सही संकेत नहीं है।3. ‘क्रेडिट की राजनीति’ और एआई पोस्टरों का विवादएक ओर जहां पीड़ित जनता और समर्पित कार्यकर्ता उपेक्षा से आहत हैं, वहीं दूसरी ओर मंडल अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।सोशल मीडिया पर नंबरबाज़ी: विरोध का सामना कर रहे निसरपुर मंडल अध्यक्ष शिवम यादव पर आरोप लग रहे हैं कि वे एआई जनरेटेड पोस्टरों और प्रायोजित खबरों के जरिए यह प्रचारित करने में जुटे हैं कि सांसद का यह दौरा उनके कहने पर ही हुआ था।संगठन के सामने चुनौती: कार्यकर्ताओं का सवाल है कि जब सैकड़ों पीड़ित जनता और निष्ठावान कार्यकर्ता इंतजार में खड़े थे, तब पदाधिकारी सिर्फ अपनी छवि चमकाने और श्रेय लेने की होड़ में क्यों व्यस्त हैं?4. सुलगता सवाल: जनसेवा या सिर्फ राजनीति?क्षेत्र में अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या जनप्रतिनिधियों को जनता की असली समस्याओं और धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज सुननी चाहिए, या सिर्फ सोशल मीडिया पर श्रेय लेने वाले पदाधिकारियों की? निसरपुर के डूब प्रभावित आज भी अपने संवैधानिक हक और ठोस समाधान के इंतजार में हैं।