आज चंदेरी स्थित माँ जागेश्वरी मंदिर परिसर में लगभग ₹20 करोड़ की लागत से चल रहे जीर्णोद्धार एवं विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की

मेरा स्पष्ट मानना है कि हमारी आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसलिए निर्देश दिए कि सीसी रोड के स्थान पर पारंपरिक पत्थरों का उपयोग किया जाए, संपूर्ण जीर्णोद्धार राज्य पुरातत्व विभाग के मार्गदर्शन में हो तथा चंदेरी और ग्वालियर के पारंपरिक पत्थरों का ही प्रयोग किया जाए। टाइल्स से लेकर रेलिंग तक प्रत्येक निर्माण स्थानीय स्थापत्य और विरासत के अनुरूप हो।
मेरे पूज्य पूर्वज श्रीमंत माधवराव सिंधिया प्रथम द्वारा वर्ष 1894 में निर्मित सागर ताल हमारी ऐतिहासिक धरोहर का महत्वपूर्ण प्रतीक है। माँ जागेश्वरी मंदिर, सागर ताल और ऐतिहासिक झरोखों की मूल गरिमा एवं पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए चंदेरी की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाना हमारा संकल्प है।