कसरावद ,गांगलेश्वर पहाड़ी को मिला संरक्षण, 8.72 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को हस्तांतरित।
रिपोर्टर नवीन रायली एक दशक के संघर्ष के बाद प्रशासन का बड़ा फैसला, होगा वृक्षारोपण और नगर वाटिका विकसित करने का प्रस्तावनगर के प्राचीन श्री गांगलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र स्थित पहाड़ी को अतिक्रमण से बचाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रशासन ने पहाड़ी से जुड़ी कुल 8.72 हेक्टेयर शासकीय भूमि वन विभाग को हस्तांतरित कर दी है। अब इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा तथा भविष्य में नगर वाटिका विकसित करने का भी प्रस्ताव है।जानकारी के अनुसार गांगलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की लगभग 40 हेक्टेयर भूमि में से करीब 50 प्रतिशत हिस्से पर वर्षों से अतिक्रमण हो चुका था। इसके बावजूद लगभग 120 एकड़ भूमि सुरक्षित बची हुई थी। इस शेष क्षेत्र को संरक्षित रखने और हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रशासन ने दो अलग-अलग खसरा नंबरों की सरकारी भूमि वन विभाग को सौंप दी है।जारी आदेश के अनुसार ग्राम रसीदपुरा, तहसील कसरावद के खसरा नंबर 55/1/1 की कुल 37.480 हेक्टेयर भूमि में से 6.000 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 55 की कुल 40.720 हेक्टेयर भूमि में से 2.720 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की गई है। इस प्रकार कुल 8.72 हेक्टेयर भूमि अब वन विभाग के संरक्षण में रहेगी।वन विभाग द्वारा इस पूरी पहाड़ी पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही यहां नगर वाटिका विकसित करने का प्रस्ताव भी प्रशासन को भेजा गया है, ताकि पहाड़ी का पर्यावरणीय एवं धार्मिक महत्व लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।एक दशक तक चला संरक्षण का अभियानभाजपा नेता एवं समाजसेवी विरेंद्र पाटीदार पिछले लगभग दस वर्षों से गांगलेश्वर महादेव पहाड़ी को अतिक्रमण से बचाने के लिए लगातार प्रयासरत रहे। उन्होंने प्रशासन से निरंतर पत्राचार किया, पहाड़ी क्षेत्र में तार फेंसिंग करवाई और स्वयं वृक्षारोपण अभियान भी चलाया। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद अतिक्रमण पूरी तरह नहीं रुक पाया।विरेंद्र पाटीदार ने कहा कि गांगलेश्वर महादेव मंदिर की इस पहाड़ी को बचाने की लड़ाई करीब एक दशक तक चली है। अब वन विभाग को भूमि हस्तांतरित होने से उम्मीद है कि वृक्षारोपण और प्रस्तावित नगर वाटिका के माध्यम से यह पहाड़ी भविष्य में अतिक्रमण से सुरक्षित रह सकेगी तथा नगरवासियों को एक सुंदर हरित एवं प्राकृतिक स्थल उपलब्ध होगा।